ट्रंप की गाजा शांति योजना से पाकिस्तान संकट में, असीम मुनीर के सामने सबसे कठिन कूटनीतिक परीक्षा

वर्ल्ड न्यूज। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के बीच हालिया मुलाकातों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब ट्रंप प्रशासन की गाजा शांति योजना ने पाकिस्तान को एक जटिल कूटनीतिक और रणनीतिक जाल में फंसा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति और स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से एक 20-सूत्रीय शांति योजना तैयार की है। इस योजना का प्रमुख बिंदु युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निर्माण के लिए मुस्लिम देशों की सेनाओं की तैनाती है। इसी क्रम में ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से गाजा में पाकिस्तानी सैनिक भेजने की स्पष्ट मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, व्हाइट हाउस में कुछ महीने पहले हुई मुलाकातों और आपसी नजदीकियों के बाद अब इस मांग ने जनरल असीम मुनीर को उनके करियर की सबसे कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है। यह फैसला न केवल पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करेगा, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी गहरा असर डालेगा।

दोधारी तलवार में फंसा पाकिस्तान
इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान के सामने दो ही विकल्प हैं, और दोनों ही बेहद जोखिम भरे माने जा रहे हैं। यदि पाकिस्तान इस मांग को ठुकराता है, तो अमेरिका के साथ हाल के वर्षों में सुधरते संबंध फिर से बिगड़ सकते हैं। वित्तीय सहायता, निवेश और सुरक्षा सहयोग पर रोक लगने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का खतरा भी मंडरा रहा है, जो पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए भारी झटका साबित हो सकता है।

स्वीकार करने पर भी संकट
दूसरी ओर, यदि पाकिस्तान गाजा में सैनिक भेजने के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो देश के भीतर बड़े विरोध की आशंका है। पाकिस्तान में फिलिस्तीन के प्रति जनता की भावनाएं बेहद प्रबल हैं। अमेरिका समर्थित किसी ऐसी योजना का हिस्सा बनने पर, जिसमें हमास के निरस्त्रीकरण की बात हो, इस्लामिक संगठनों और इमरान खान समर्थक गुटों के सड़कों पर उतरने की संभावना है। इससे देश में गंभीर अशांति甚至 गृहयुद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।

सैन्य दृष्टि से भी यह फैसला चुनौतीपूर्ण होगा। पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान सीमा पर उग्रवाद से जूझ रहा है। ऐसे में गाजा में सेना भेजने से घरेलू सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। साथ ही मुस्लिम दुनिया में पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचने और उसे “अमेरिका के एजेंट” के रूप में देखे जाने का खतरा भी जताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान का यह फैसला न केवल उसकी विदेश नीति बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

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