- रिपोर्ट: एम. पी. भार्गव
ऐलनाबाद, 17 नवंबर।चौधरी मनीराम झोरड़ राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य डा. सज्जन कुमार की अध्यक्षता में पंजाबी विभाग एवं विषय परिषद तथा वाणिज्य विभाग एवं विषय परिषद के संयुक्त तत्वावधान में “गुरु तेग बहादुर जी: दर्शन परम्परा” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में गुरु हरि सिंह कॉलेज, जीवननगर के पूर्व प्राचार्य डा. बूटा सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में धर्म, मानवता और सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहिब का स्थान अद्वितीय है। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी ने मुगलिया सल्तनत की अत्याचारपूर्ण नीतियों का विरोध किया और 1675 में औरंगज़ेब के सामने धर्म बदलने से दृढ़ता से इंकार किया।
डा. बूटा सिंह ने कहा कि गुरु साहब ने स्पष्ट कहा—
“सीस कटा सकते हैं, केश नहीं।”
इसके बाद औरंगज़ेब ने उनका सार्वजनिक रूप से शहीद कराया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और रकाब गंज साहिब इसी ऐतिहासिक बलिदान की याद दिलाते हैं। गुरुजी की शहादत धार्मिक स्वतंत्रता, वैचारिक आज़ादी और मानवता के संरक्षण का सर्वोच्च उदाहरण है, जो आज भी विश्व को प्रेरित करता है।
सेमिनार में डा. अमनप्रीत कौर ने छात्राओं को गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, वाणी और विचारधारा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का संदेश सहनशीलता, न्याय, समानता, निडरता और मानव सेवा से परिपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को अंधविश्वास, भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि डा. बूटा सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
सेमिनार का मंच संचालन डा. जोगिंद्र सिंह ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
