अखिल भारतीय स्वास्थ्य एवं एनएचएम महासंघ ने केन्द्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से की मुलाकात, अधूरी मांगों को लेकर सौंपी मांगपत्र
नई दिल्ली, 12 नवंबर। अखिल भारतीय स्वास्थ्य एवं एनएचएम महासंघ के महामंत्री दिनेश कुमार कौशिक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से मुलाकात की। बैठक लगभग दो घंटे तक चली और इसमें स्वास्थ्य संविदा एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से जुड़े कर्मचारियों की लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में भारतीय मजदूर संघ के केन्द्रीय उपमहामंत्री एवं स्कीम प्रभारी सुरेन्द्र पाण्डेय, संगठन मंत्री बी. सुरेन्द्रन, महामंत्री दिनेश कौशिक और मंत्री योगेश कुमार उपाध्याय उपस्थित रहे। इस दौरान मंत्री को विस्तृत मांगपत्र सौंपा गया।
महासंघ ने मांग की कि 7वें वेतन आयोग के अनुसार ₹18,000 न्यूनतम मूल वेतन, महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि, ग्रेच्युटी, पेंशन, पीएफ, सामाजिक सुरक्षा लाभ, वेतन का प्रत्यक्ष भुगतान और आउटसोर्सिंग की समाप्ति, दीर्घकालिक सेवा पर लॉयल्टी बोनस, सेवानिवृत्ति पर ₹20 लाख की एकमुश्त राशि तथा सेवा आयु 65 वर्ष किए जाने जैसी सुविधाएँ दी जाएँ। साथ ही निष्कासन किए गए कर्मचारियों की बहाली के लिए निष्पक्ष जांच समिति गठित करने की भी मांग की गई।
अन्य मांगों में One Nation – One Health – One Human Resource Policy का क्रियान्वयन, डीए, टीए, बोनस, अवकाश, स्थानांतरण नीति, सरकारी भर्तियों में आयु छूट और मध्यप्रदेश की तर्ज पर 50 प्रतिशत कार्यरत कर्मचारियों के समायोजन जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
महासंघ के महामंत्री कौशिक ने कहा कि देशभर में स्वास्थ्य एवं एनएचएम, एम्बुलेंस संविदा कर्मी सीमित संसाधनों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान इनकी भूमिका अभूतपूर्व रही है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
बैठक के अंत में श्रम मंत्री डॉ. मांडविया ने न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विषयों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को अग्रेषित किया जाएगा और निकट भविष्य में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इन मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
