नई दिल्ली।दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आतंकियों की साजिश की नई-नई परतें खुलती जा रही हैं। जांच एजेंसियों को अब एक डिजिटल चैटबॉक्स मिला है, जिसमें आतंकियों ने पूरी साजिश को कोडवर्ड्स के ज़रिए अंजाम दिया था। इस विस्फोट में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है।
“दावत के लिए बिरयानी तैयार है” — मौत का संकेत
जांच में खुलासा हुआ है कि धमाके से जुड़ी बातचीत में आतंकियों ने “दावत” शब्द का इस्तेमाल हमले के लिए किया था, जबकि “बिरयानी” शब्द से विस्फोटक सामग्री का जिक्र किया गया था।
इस चैट में मिला आखिरी संदेश था — “दावत के लिए बिरयानी तैयार है”, जो कि 13 जुलाई 2025 को डॉ. शाहीन अंसारी की ओर से भेजा गया था। इसके बाद यह चैटबॉक्स निष्क्रिय हो गया।
डिजिटल निगरानी से बचने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों ने जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए रोज़मर्रा के सामान्य शब्दों का प्रयोग किया ताकि डिजिटल सर्विलांस उन्हें पकड़ न सके। यह तरीका पहले भी कई आतंकी घटनाओं में अपनाया गया है, लेकिन इस बार के कोडवर्ड्स ने एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।
एनआईए और साइबर सेल की जांच तेज़
एनआईए ने अब इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच को तेज़ कर दिया है। माना जा रहा है कि इस चैटबॉक्स के ज़रिए आतंकी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान जल्द की जा सकेगी।
एजेंसियों का मानना है कि यह कोई इंडिविजुअल हमला नहीं, बल्कि एक संगठित मॉड्यूल की सुनियोजित साजिश थी।
जांच अधिकारी ने बताया कि —
“आतंकी इतने संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम थे कि उन्होंने सोशल मीडिया, चैटबॉक्स और कोडवर्ड्स के जरिए पूरी वारदात की रूपरेखा तैयार की। अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच से इस जाल को पूरी तरह बेनकाब किया जाएगा।”
