- रिपोर्ट: शिवेंदु श्रीवास्तव
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनता को राहत देने के उद्देश्य से सरकारी बकाया वसूली प्रणाली में बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब विभागीय बकायों की अदायगी के दौरान नागरिकों से 10 प्रतिशत वसूली प्रभार नहीं लिया जाएगा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए उपजिलाधिकारी घोरावल आशीष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि “राज्य सरकार ने 11 फरवरी 2016 को पूर्व प्रचलित जमींदारी विनाश अधिनियम 1950 को समाप्त कर ‘उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006’ लागू की थी। नई व्यवस्था में जनता को राहत देने के लिए वसूली प्रभार की सीमा शून्य कर दी गई है। अब यदि कोई बकायदार स्वेच्छा से अपना बकाया जमा करता है तो उस पर किसी प्रकार का अतिरिक्त 10% या 5% प्रभार नहीं लगेगा।” उन्होंने आगे बताया कि “यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर भुगतान से बचता है और उसके विरुद्ध कुर्की या गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई करनी पड़ती है, तो ऐसी स्थिति में ही अधिकतम 5 प्रतिशत वसूली प्रभार वसूलने का प्रावधान किया गया है।”
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि “किसी भी संग्रह अमीन द्वारा सामान्य बकाया अदायगी के दौरान 10% प्रभार के नाम पर वसूली करना पूरी तरह अवैधानिक है। यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति को तत्काल तहसील प्रशासन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य है कि आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी व कानूनी दायरे में रहे।
