Shardiya Navratri Last Day Puja: जानें नवरात्रि समाप्ति के बाद कलश, नारियल, जौ, सिक्का और सुपारी का क्या करें
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि का समापन अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन एवं व्रत पारण के साथ होता है। इसके बाद दशमी के दिन रावण दहन कर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, जिसमें कलश, नारियल, सिक्का, सुपारी और जौ का विशेष महत्व होता है। लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि नवरात्रि समाप्ति के बाद इन पूजन सामग्रियों का क्या किया जाना चाहिए।
जौ से होती है दशहरा की पूजा
नवरात्रि में बोए गए जौ दशहरा (दशमी) के दिन काटकर पूजा में रखे जाते हैं। इन्हें घर के पुरुषों के कान के पीछे लगाया जाता है। कुछ जौ लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखे जाते हैं, जिससे धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।
बच्चों की किताबों में जौ रखना शुभ माना जाता है।
बीमार व्यक्ति को अंकुरित जौ की पत्तियों का रस पिलाने से लाभ होता है।
बचे हुए जौ को नदी में विसर्जित करना या मंदिर में पीपल/बरगद के नीचे रखना उचित माना गया है।
कलश, नारियल, सिक्का और सुपारी का महत्व
कलश के चावल किसी पौधे में डालें और कलश का जल घर में छिड़कें या स्नान जल में मिलाएं।
नारियल को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
सिक्का और सुपारी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। यह घर में बरकत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार नवरात्रि की पूजन सामग्रियों का सही तरीके से उपयोग करने से धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि https://www.khabrejunction.com/ नहीं करता। अधिक जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
