उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य नहीं: मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नियुक्त शिक्षकों के बीच पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद टीईटी (TET) को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसी मुद्दे पर आज हजारों शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त पूर्णकालिक शिक्षकों को सेवाकाल जारी रखने या पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि भारत सरकार द्वारा 2009 में लागू किए गए निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23 के तहत केवल 25 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और टीईटी को आवश्यक किया गया था। जबकि, उत्तर प्रदेश में यह अधिनियम 29 जुलाई 2011 से प्रभावी हुआ। ऐसे में इस तारीख से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होती।
ज्ञापन में मुख्य बिंदु:
29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं।
भारत सरकार के राजपत्र और NCTE के नियम स्पष्ट रूप से इसका समर्थन करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे शिक्षकों में भ्रम फैला।
हजारों शिक्षकों ने कहा कि यदि इस पर जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस ज्ञापन पर प्रेम सिंह चौहान, अजय राठौर, विक्रम सिंह, अशोक मेहरा, डॉ. सरफराज अहमद, सुभाष राठौर, अफरोज मियां, नरेंद्र सैनी, मनोज कुमार सहित दर्जनों शिक्षक नेताओं ने हस्ताक्षर किए। ज्ञापन सौंपते समय जिले की पूरी कार्यकारिणी, ब्लॉक स्तर के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
किसानों के बाद अब शिक्षक वर्ग भी सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रदेश सरकार शिक्षकों की मांग मानते हुए आधिकारिक आदेश जारी करेगी या आंदोलन की स्थिति बनेगी।
