काठमांडू। नेपाल की राजनीति इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया बैन हटने के बावजूद ओली सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। कथित भ्रष्टाचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमलों के आरोपों ने लोगों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
सोमवार को हुए बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शन में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 340 से अधिक लोग घायल हुए। हालात बिगड़ने पर सरकार ने राजधानी काठमांडू सहित कई जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया।
कर्फ्यू के आदेश और प्रतिबंधित इलाके
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने मंगलवार सुबह 8:30 बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया। आदेश में साफ कहा गया कि लोगों की आवाजाही, रैली, धरना या सभा पर पूरी तरह रोक रहेगी। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, दमकल, स्वास्थ्यकर्मी, मीडिया, पर्यटक और हवाई यात्रियों को विशेष छूट दी गई है।
इसके अलावा भक्तपुर और ललितपुर जिलों में भी कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए हैं। भक्तपुर प्रशासन ने पेप्सीकोला, राधेराधे चौक, सल्लाघारी, दुवाकोट और चांगु नारायण मंदिर क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया है। ललितपुर में चापागांव और थेचो इलाकों में भी कड़ी पाबंदियां लागू की गई हैं।
छात्रों का विरोध और अफरातफरी
कर्फ्यू लागू होने के बावजूद मंगलवार सुबह छात्र सड़कों पर उतर आए। काठमांडू के कलंकी और बानेश्वर इलाकों में जमावड़े हुए और “छात्रों की हत्या मत करो” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर सड़कें जाम कर दीं। ललितपुर के चापागांव और थेचो से भी उग्र विरोध की खबरें आईं।
कर्फ्यू के कारण राजधानी और आसपास के जिलों में भय और अफरातफरी का माहौल है। लोग जरूरी सामान खरीदने दुकानों और दवा की दुकानों पर टूट पड़े। सार्वजनिक परिवहन बंद हो गया और सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए।
संसद भवन में आग और वित्त मंत्री पर हमला
बीते दिन का विरोध नेपाल के हालिया इतिहास का सबसे हिंसक साबित हुआ। गुस्साए आंदोलनकारियों ने संसद भवन में घुसकर आगजनी की और पुलिस से सीधी भिड़ंत हुई। भीड़ ने नेपाल के वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
भारत ने जारी की एडवाइजरी
नेपाल की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीयों को भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और यात्रा से पहले सुरक्षा हालात की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
सरकार पर विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने ओली सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे और हिंसा की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
राजनीतिक संकट गहराया
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो यह संकट नेपाल की राजनीतिक स्थिरता पर गहरा असर डाल सकता है। सोशल मीडिया बैन ने खासकर युवाओं और छात्रों में गुस्से को चरम पर पहुंचा दिया है। अब कर्फ्यू के बावजूद सड़कों पर उतरते लोग यह संदेश दे रहे हैं कि जनता की नाराजगी बेहद गहरी है।
सवाल यह है कि क्या ओली सरकार बढ़ते जनाक्रोश को शांत कर पाएगी या नेपाल एक और बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है?
