- रिपोर्ट- मंजय वर्मा
नई दिल्ली – लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों पर लगातार दबाव और कार्रवाई की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी क्रम में देश के जाने-माने पत्रकार और यूट्यूबर अभिसार शर्मा पर गुवाहाटी में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।
पत्रकार जब आम जनता की आवाज़ बनकर निडरता से सवाल उठाता है, तो वह व्यवस्था को असहज कर देता है। यही वजह है कि कई नामचीन पत्रकार – पुण्य प्रसून वाजपेयी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम आदि – भी वर्षों से उपेक्षा और दबाव का सामना करते रहे हैं।
अभिसार शर्मा पर दर्ज यह मामला पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक और बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनकी बेबाक पत्रकारिता सत्ता को कठघरे में खड़ा करती रही है और इसी वजह से उन्हें हाशिए पर धकेलने की कोशिशें की जा रही हैं।
आज जब देश में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और छात्रों की समस्याएं चरम पर हैं, ऐसे में पत्रकारों पर कार्रवाई होना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
