हरियाणा असेंबली चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए बोगस वोटिंग नहीं कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व ज़िम्मेदार

नया नेतृत्व खड़ा नहीं किया तो आने वाले चुनाव में इससे भी बड़ी हार होनी तय है

गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

हरियाणा असेंबली चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए बोगस वोटिंग नहीं कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व ज़िम्मेदार- नया नेतृत्व खड़ा नहीं किया तो आने वाले चुनाव में इससे भी बड़ी हार होनी तय है i

हरियाणा असेंबली चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए बोगस वोटिंग नहीं कांग्रेस नेतृत्व जिम्मेवार i जागरूक पाठक राजीव वत्स के सौजन्य से i जब भी वोटों के घोटाले पर बात होती है, हरियाणा के कांग्रेसी नेताओं के चमचे बल्लियों उछलने लगते हैं क्योंकि उनके फेल हो चुके आकाओं को हार की जिम्मेदारी से बचने का बहाना मिल जाता है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार स्वाभाविक थी।

जिस दिन राहुल गांधी ने सामूहिक नेतृत्व को खत्म करके केवल एक ही परिवार को राज्य की बागडोर सौंप दी थी पार्टी की हार तो उसी दिन तय हो गई थी। उत्तरी हरियाणा तथा दक्षिणी हरियाणा का जातीय समीकरण भूपिंदर सिंह हुड्डा साहब के पक्ष में नहीं था और इन क्षेत्रों से पुराने क्षत्रप पार्टी छोड़ चुके हैं।
हरियाणा की सभी ग्रामीण सीटों पर सरपंच चुनाव की तरह इलेक्शन खिंचा हुआ था। वोटर लिस्ट में किसी भी गांव में एक भी गलत वोट नहीं जुड़ सकता था। ऊपर से हरियाणा में चौधर कांग्रेसियों के पास थी तो ग्रामीण सीटों पर कोई गुंजाइश नहीं थी। गुड़गांव, फरीदाबाद, अम्बाला, पंचकूला जैसे शहरों की वोटर लिस्ट में भाजपा के लिए कुछ गुंजाइश बन सकती थी लेकिन, यहां भाजपा वैसे ही मजबूत स्थिति में थी इसलिए यहां इन्हें कुछ करने की जरूरत ही नहीं थी।

हर सीट पर पहले 50- 60 दावेदार खड़े कर दिए, उनके लाखों खर्च करवा दिए और जब टिकट बंटने लगी तो उन्हीं पुराने बुड्ढों को टिकटें पकड़ा दी। ऊपर से इनकी नाराजगी को कम करने के लिए कुछ नहीं किया गया।

रोहतक सोनीपत को छोड़कर प्रदेश के युवा पर्ची सिस्टम की वापसी से डर रहे थे।
तुम तो चुनाव उसी समय हार गए थे जब तुम्हारा अध्यक्ष खुलेआम कह रहा था कि 1 लाख 20 हजार नौकरियों में से कम से कम 5000 तो उनके हिस्से में आएंगी। भाजपा तुम्हे इसी पिच पर लाना चाहती थी और तुम दौड़े चले आए। प्रदेश के युवा को तुमने डरा दिया कि रैलियों में रुक्के मारने वाले सिपाही लगेंगे, काली स्कॉर्पियो वाले थानेदार बनेंगे और रैलियों में 10- 20 गाड़ी भेजने वाले डीएसपी और एसडीएम।

रही सही कसर काली स्कॉर्पियो वाले प्रॉपर्टी डीलर प्रचारकों ने पूरी कर दी।

हरियाणा के कांग्रेसियों को 49 महीने पहले ही बता रहा हूं कि यदि कांग्रेस ने प्रदेश में संगठन पर काम नहीं किया और नया नेतृत्व खड़ा नहीं किया तो 2029 में इससे भी बड़ी हार होनी तय है क्योंकि इन्होंने 2024 की हार से कोई सबक नहीं लिया।

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