सीतापुर, 6 अगस्त। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में एक बार फिर अफसरशाही की हठधर्मिता सामने आई है। इस बार खुद सरकार के मंत्री को ही अधिकारियों की उपेक्षा और अभद्रता का शिकार होना पड़ा। मामला सीतापुर जिले के एक गांव का है, जहां बीते 20 दिनों से ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण ग्रामीणों को बिजली नहीं मिल रही थी।
गांव की समस्या को लेकर कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही ने पहले पावर कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल को फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल उठाना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद मंत्री ने स्थानीय जूनियर इंजीनियर (JE) रमेश कुमार मिश्रा से ट्रांसफॉर्मर बदलवाने की बात कही।
JE साहब का जवाब सुनकर मंत्री भी सन्न रह गए। JE ने सीधे कहा, “खुद आकर ट्रांसफॉर्मर उतरवा लो और लगवा भी लो!”
यह सुनते ही मंत्री सुरेश राही ने विरोधस्वरूप खुद ट्रांसफॉर्मर उतारने के लिए पहुंचने का फैसला किया और फिर गांव में धरने पर बैठ गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधियों के टकराव को फिर उजागर कर दिया है। यह पहला मामला नहीं है जब मंत्री की बात को नजरअंदाज किया गया हो। इससे पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी सार्वजनिक मंच से कहा था कि
“मैं एक JE का तबादला तक नहीं कर सकता!”
अब सवाल उठता है कि अगर मंत्री की सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी?
मंत्रियों की साख और सम्मान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर ऐसे ही हालात रहे, तो सरकार को एक आधिकारिक पत्र जारी कर देना चाहिए, जिसमें यह निर्देश हो कि
“जनप्रतिनिधि जब किसी अधिकारी के पास जाएं, तो पहले अगरबत्ती, फूल और स्तुति लेकर जाएं, ताकि अधिकारियों का मन प्रसन्न हो और काम हो सके।”
इस ताज़ा घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि योगी सरकार के भीतर की खामियों को भी उजागर कर दिया है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।
