पुलिस की थर्ड डिग्री से किशोर की मौत, इंसाफ के सवाल पर खड़ी एटा पुलिस

  • रिपोर्ट – मनोज कुमार यादव

एटा – उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस हिरासत मे एक 16 साल के किशोर की थर्ड डिग्री टॉर्चर की वजह से मौत हो गई। इस घटना के बाद न सिर्फ मृतक के परिजन बल्कि स्थानीय जनमानस में भी रोष व्याप्त है। लोग पूछ रहे हैं – क्या पुलिस सुरक्षा का माध्यम है या डर और दमन का?

मामला एटा के निधौली कलां थाना गांव चंद्रभानपुर का है, एसएसपी कार्यालय पहुंचे परिजनों ने बताया कि लड़की प्रकरण के शक में किशोर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। पूछताछ के नाम पर उसे थर्ड डिग्री दी गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई आनन फानन पुलिस ने लड़के को रात में ही छोड़ दिया । मारपीट के कारण उसकी मौत हो गई। परिवारजनों नें पुलिस कप्तान से न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस कप्तान ने मामले को गम्भीरता से लिया और दो दरोगाओं को तत्काल प्रभाव से लाईन हाजिर कर दिया।

एसएसपी एटा ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन आमजन में यह विश्वास नहीं बन पा रहा कि जांच निष्पक्ष होगी।

क्या पुलिस को पूछताछ के नाम पर किसी की जान लेने का हक है?
क्या नाबालिगों के साथ ऐसा व्यवहार भारत के संविधान और कानून की आत्मा के खिलाफ नहीं है?
अगर पुलिस ही न्याय व्यवस्था को कुचल दे, तो आम नागरिक कहां जाए?

मृतक के परिजनों का कहना है कि “हमारा बच्चा दोषी था या नहीं, यह तय करने का अधिकार कानून का था, न कि पुलिस की लाठी का। अगर पुलिस ने इतनी बेरहमी से न मारा होता, तो आज वो ज़िंदा होता।”
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस सुधार केवल कागजों तक सीमित है। जब तक थानों में मानवाधिकारों की रक्षा नही होगी तब तक ‘पुलिस पर भरोसा’ एक खोखला नारा ही रहेगा।

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