- रिपोर्ट- मंजय वर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं। इसकी वजह बना है नगर विकास विभाग का एक पत्र, जिसमें पंचायतीराज विभाग के 21 मई 2025 के शासनादेश को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। इस आदेश में नए नगर निकायों के गठन और सीमा विस्तार पर रोक लगाई गई है, जिससे पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर संकट खड़ा हो गया है।
जब तक नगर विकास विभाग अपना आदेश वापस नहीं लेता, तब तक पंचायत चुनाव की सीमा निर्धारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी, जिससे चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टल सकते हैं।
पंचायत चुनावों को लेकर जारी हुई थी समय-सारणी:
हाल ही में पंचायतीराज विभाग ने पंचायत चुनाव के लिए निर्धारित कार्यक्रम जारी किया था —
18 से 22 जुलाई 2025: ग्राम पंचायत की जनसंख्या का आकलन
23 से 28 जुलाई: ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के वार्डों की प्रस्तावित सूची का प्रकाशन
29 जुलाई से 2 अगस्त: प्रस्तावों पर आपत्तियाँ प्राप्त करना
3 से 5 अगस्त: आपत्तियों का निस्तारण
6 से 10 अगस्त: निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम सूची का प्रकाशन
क्या है विवाद की जड़?
बीते वर्षों में प्रदेश में कई नई नगर पालिकाएं व नगर पंचायतें गठित हुई हैं और नगर निगमों का दायरा भी बढ़ा है। इसके चलते कई ग्राम पंचायतों का क्षेत्र शहरी निकायों में शामिल हो गया है। इस बदलाव का असर पंचायतों की वास्तविक ग्रामीण आबादी और वॉर्डों की संख्या पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से पंचायतीराज विभाग ने परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन अब नगर विकास विभाग के पत्र ने इस प्रक्रिया पर अस्थायी विराम लगा दिया है।
आगे क्या?
अब निगाहें नगर विकास विभाग पर टिकी हैं कि वह कब तक अपने आदेश को संशोधित करता है। यदि देरी हुई, तो पंचायत चुनावों की प्रक्रिया और लंबे समय के लिए टल सकती है। चुनाव आयोग व राज्य सरकार के सामने अब इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की चुनौती है, ताकि ग्राम स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
