इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बड़ा बयान: “उम्मीद है कुछ दिनों में बंधकों की रिहाई का समझौता हो जाएगा”
हमास के कब्जे में अब भी 50 बंधक, सिर्फ 20 के जीवित होने की संभावना: नेतन्याहू
वाशिंगटन: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में हमास के कब्जे से और बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमास के पास अब भी 50 बंधक हैं, जिनमें से सिर्फ 20 के जीवित होने की संभावना है।
Newsmax को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा…
“मैं चाहता हूं कि हम सभी बंधकों को बाहर निकालें। अभी जो समझौता हुआ है, उससे मृतकों को वापस लाया जा सकेगा। इससे 10 जीवित बंधक और लगभग 12 मृत बंधक बचेंगे। लेकिन मैं उन्हें भी बाहर निकालूंगा। मुझे उम्मीद है कि हम इसे कुछ दिनों में पूरा कर लेंगे,” नेतन्याहू ने कहा।
7 अक्टूबर 2023 का हमला और अब तक की स्थिति
7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने दक्षिणी इजरायल पर हमला किया था, जिसमें 1,200 लोगों की मौत हुई और 251 बंधक बना लिए गए थे।
जवाबी कार्रवाई में इजरायल की बमबारी से गाजा में अब तक 57,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हुई है और अधिकतर इलाका मलबे में तब्दील हो गया है।
दो बार हुआ संघर्षविराम, तीसरी बार 60 दिन का हो सकता है सीजफायर
नेतन्याहू ने कहा कि अब तक दो संघर्षविराम हो चुके हैं — एक नवंबर 2023 में और दूसरा जनवरी 2025 में। इस बार संभावित 60 दिनों का संघर्षविराम दोनों पक्षों को शांति समझौते की दिशा में बढ़ने का मौका दे सकता है।
हमास की आपत्ति: मानवीय सहायता और इजरायली सेना की वापसी पर अड़ी मांग
हमास ने कहा है कि बातचीत में अब भी कुछ मुख्य विवाद हैं — जैसे गाजा में मानवीय सहायता की बहाली, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, और स्थायी संघर्षविराम की गारंटी।
नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा और ट्रंप से करीबी
यह इंटरव्यू नेतन्याहू ने अपनी तीसरी अमेरिका यात्रा के दौरान दिया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि,
“इजरायल को व्हाइट हाउस में इतना बड़ा समर्थन पहले कभी नहीं मिला।”
ईरान पर हमला और परमाणु खतरा
नेतन्याहू ने बताया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमले में ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया गया।
उन्होंने कहा, “अगर हमला नहीं होता, तो कुछ महीनों में ईरान परमाणु बम बना सकता था।”
नेतन्याहू का यह बयान संकट के समाधान की एक नई उम्मीद लेकर आया है, हालांकि हमास की शर्तों और क्षेत्रीय तनाव के चलते रास्ता अभी भी आसान नहीं दिखता।
