RGHS घोटाला केस : न्यायपालिका और सरकार पर उठे सवाल: “चोर-चोर मौसेरे भाई”, आमजन की पीड़ा या सच्चाई?

सरकार और न्याय व्यवस्था की निष्क्रियता पर तीखा प्रहार, जनता में बढ़ रहा आक्रोश

जयपुर : सिर्फ ढोल बजाना जानती है सरकार?
जनता का आरोप है कि सरकार केवल प्रदर्शन, रैली और समारोहों में व्यस्त है, जिनका आम लोगों के जीवन पर कोई असर नहीं होता। बड़े-बड़े आयोजन महज़ दिखावा बनकर रह गए हैं। ये आयोजन हराम की कमाई से इकट्ठा किए गए धन से किए जाते हैं, जिससे राजनेता अपने आकाओं को खुश करते हैं।

जयपुर में आतंकी हमला, पर न्याय कहां?
राजस्थान के जयपुर में बम धमाकों ने हजारों घर तबाह कर दिए, लेकिन किसी भी दोषी को फांसी की सजा नहीं दी गई। यह सवाल आमजन के मन में घर कर गया है कि क्या न्याय सिर्फ पैसे वालों के लिए है?

स्वतंत्र भारत में बिकती है सत्ता?
जनता का आरोप है कि पैसे वालों ने सरकार को खरीद रखा है। सर्वोच्च न्यायालय रात में सुनवाई करता है, जिससे न्याय प्रणाली पर ढोंग का आरोप लग रहा है।

जज के घर नोटों में लगी आग, पर FIR क्यों नहीं?
दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश वर्मा के घर बोरों में भरकर रखे गए नोटों में आग लग गई, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जनता पूछ रही है कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग क्यों चुप हैं?

“न्यायपालिका भी कर रही है ढोंग” – जनता का सवाल
जनता कहती है कि न्यायपालिका स्वप्रेरित संज्ञान (Suo Moto) लेती है, मगर वास्तविक भ्रष्टाचार पर मौन रहती है। न्यायपालिका आम नागरिक को सड़क पर पैसा मिलने पर सज़ा देती है, पर न्यायाधीशों के काले धन पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं?

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