रामपुर: ग्रीष्मकालीन चूसक कीट (काला चिकटा) के प्रभावी नियंत्रण के लिए एडवाइजरी जारी

कीट से बचाव के लिए किसानों को दिए गए विशेष निर्देश

रामपुर: जिला गन्ना अधिकारी शैलेश मौर्या ने बताया कि उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद द्वारा ब्लैक बग (काला चिकटा) के प्रभावी नियंत्रण के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। यह कीट गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है, और इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को विभिन्न उपायों का पालन करने की सलाह दी गई है।

गन्ने में काला चिकटा की रोकथाम
ब्लैक बग (काला चिकटा) एक चूसक कीट है, जो अधिक तापमान और शुष्क मौसम में सामान्यत: अप्रैल से जून तक पेड़ी गन्ने में अधिक प्रभाव डालता है। यह कीट गन्ने की पत्तियों का रस चूसता है, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। इसके परिणामस्वरूप गन्ने की बढ़वार रुक जाती है और अधिक प्रभावित पत्तियों में छिद्र हो जाते हैं।

नियंत्रण के लिए विशेष उपाय
गन्ना किसान प्रभावित गन्ने में पताई और ठूठों को गन्ना कटाई के बाद नष्ट करने की सलाह दी गई है। खेत में सिंचाई करने से काला चिकटा कीट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
यदि अत्यधिक प्रकोप हो, तो किसानों को कीटनाशक दवाओं का पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए प्रोफेनोफॉस 40 प्रतिशत व साइपरमेन्ध्रिन 4 प्रतिशत ई.सी. 750 मि.ली., इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल. 200 मि.ली. अथवा क्वीनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 825 मि.ली. अथवा क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. 800 मि. ली. प्रति हेक्टेयर की दर से 625 ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

जैव परजीवी की स्थिति में रसायनिक नियंत्रण की आवश्यकता नहीं
जहां ब्लैक बग का प्रभाव कम हो और पायरिला का प्रकोप अधिक हो, तथा जैव परजीवी भी दिखाई दे रहे हों, वहां रसायनिक नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यदि ब्लैक बग का कोई परजीवी नहीं है और उनकी संख्या अधिक हो, तो रसायनिक नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

किसानों से अपील: किसान इन निर्देशों का पालन करके काले चिकटे के प्रभाव को नियंत्रित कर सकते हैं और अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

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