भारत में मखाने की बढ़ती लोकप्रियता और उससे जुड़ी चुनौतियाँ

मखाना: पारंपरिक स्नैक से सुपरफूड तक का सफर

मखाना: पारंपरिक स्नैक से सुपरफूड तक का सफर

भारत में मखाने की बढ़ती लोकप्रियता और उससे जुड़ी चुनौतियाँ 


मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल गट्टा भी कहा जाता है, भारत में लंबे समय से एक पारंपरिक स्नैक रहा है। हाल के वर्षों में इसे एक प्रोटीन से भरपूर ‘सुपरफूड’ के रूप में प्रचारित किया गया है, जिससे इसकी मांग में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

मुख्य उत्पादक बिहार, वैश्विक बाजार में भारत का दबदबा
मखाना मुख्य रूप से बिहार के दरभंगा, मिथिला और मधुबनी जैसे जिलों में उगाया जाता है। यह जलकुंभी जैसे पानी में उगने वाले पौधे Euryale ferox के बीज होते हैं। 2023 में वैश्विक फॉक्स नट बाजार $44.4 मिलियन का था और 2030 तक इसके $97.5 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 81% से अधिक है।

सांस्कृतिक महत्व और सरकारी समर्थन
भारत में मखाना न केवल एक खाद्य पदार्थ है, बल्कि इसका सांस्कृतिक महत्व भी है। यह मंदिरों में प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है और व्रत के समय खाया जाता है। 2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने बिहार में ‘मखाना बोर्ड’ की स्थापना की घोषणा की है जिससे किसानों को बेहतर बाज़ार और समर्थन मिल सकेगा।

शारीरिक रूप से थकाने वाली खेती
मखाने की खेती बेहद श्रमसाध्य है। किसानों को कीचड़ भरे पानी में उतरकर कांटेदार बीज इकट्ठा करने पड़ते हैं। यह बीज फिर सुखाए और भूने जाते हैं। मशीनों की कमी और सुरक्षा उपकरणों के अभाव में किसान कई बार चोटिल हो जाते हैं और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हैं।

कमाई कम, लागत ज़्यादा
एक हेक्टेयर मखाना की खेती पर औसतन ₹1,09,395.70 खर्च आता है, जबकि उत्पादन लगभग 2,037.5 किलो होता है। इसमें 35.75% खर्च केवल मानव श्रम पर होता है। 2022 में भंडारण और ओवरसप्लाई के कारण कीमतें ₹500/किलो से घटकर ₹250-300/किलो तक पहुंच गई थीं, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।

बिचौलियों की भूमिका और जागरूकता की कमी
कई किसानों को मार्केट रेट की जानकारी नहीं होती, जिससे बिचौलिए लाभ कमाते हैं और किसानों को नुकसान होता है। “हमें यह नहीं पता कि हमें कितने में बेचना चाहिए, दाम बिचौलिये तय करते हैं,” कहते हैं दरभंगा के किसान कुमार।

मशीनों और नवाचार की जरूरत
मिथिला नैचुरल्स के संस्थापक मनीष आनंद का मानना है कि अगले दो वर्षों में मखाना उत्पादन में कुछ मशीनें आ सकती हैं, जिससे मेहनत कम हो सकेगी। इसके अलावा, मौसमी पलायन की समस्या भी इस क्षेत्र में मौजूद है।

चीन से प्रतिस्पर्धा और नकली उत्पादों का खतरा
चीन में “Qian Shi” नामक फॉक्स नट लोकप्रिय हो रहा है। नकली ब्रांड और पैकिंग की नकल जैसे मामलों से भारत के असली ब्रांड्स को नुकसान हो रहा है। इससे बाजार में भ्रम पैदा होता है और कीमतों में अस्थिरता आती है।

भारत ने मखाना उत्पादन में अग्रणी स्थान बनाया है लेकिन किसानों को बेहतर तकनीक, बाजार शिक्षा और सरकारी समर्थन की सख्त ज़रूरत है ताकि यह पारंपरिक फसल वैश्विक मंच पर टिक सके।

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