अक्षय तृतीया 2025: सोना या चांदी? जानिए इस साल कौन देगा बेहतर रिटर्न
सोना बनाम चांदी: क्या 2025 में चांदी सोने से ज्यादा मुनाफा देगी?
नई दिल्ली: अक्षय तृतीया के अवसर पर भारत में पारंपरिक रूप से सोना खरीदा जाता है, लेकिन 2025 में चांदी निवेश के लिहाज से और भी आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जा रही है, और निवेशकों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि क्या महंगे हो चुके सोने के बजाय चांदी में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होगा?
2025 में चांदी बन सकती है असली निवेश स्टार
कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति के अनुसार, “अब तक निवेशकों के लिए सोना एक सुरक्षित विकल्प रहा है, लेकिन चांदी की मांग में लगातार तेजी ने इसे निवेश के लिए और भी आकर्षक बना दिया है।” 2025 में चांदी ₹1,01,999 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड बना चुकी है। खास बात यह है कि चांदी की औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति इसे मजबूत निवेश विकल्प बना रही है।
इतिहास बताता है: बुल रन में चांदी देती है बेहतर रिटर्न
सतीश बताते हैं कि जब भी बहुमूल्य धातुओं में तेजी आती है, तो चांदी अक्सर सोने से ज्यादा रिटर्न देती है। 2020 की महामारी के दौरान चांदी में लगभग 63% का उछाल आया था, जबकि सोने में कम बढ़त देखी गई। इसी तरह 2024 में चांदी ने लगभग 34% का लाभ दिया, जबकि सोना 26% तक ही सीमित रहा।
औद्योगिक मांग से चांदी को मिल रही है मजबूती
जहां सोना मुख्यतः मौद्रिक भूमिका निभाता है, वहीं चांदी का बड़ा हिस्सा आधुनिक तकनीकों में इस्तेमाल होता है। 2025 में वैश्विक औद्योगिक मांग 700 मिलियन औंस से अधिक रहने का अनुमान है, जिसमें से 15% केवल सौर ऊर्जा क्षेत्र से आता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स में भी चांदी की भारी मांग है।
डिमांड-सप्लाई गैप चांदी की कीमतों को देगा और बढ़ावा
पिछले कुछ वर्षों से चांदी की आपूर्ति उसकी मांग से कम रही है। 2024 में यह गैप 200 मिलियन औंस से अधिक था और 2025 में भी यही ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। इस अंतर के चलते चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जो निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
आर्थिक कारक भी चांदी के पक्ष में
सतीश डोंडापति का मानना है कि चांदी भी सोने की तरह ही मुद्रास्फीति, केंद्रीय बैंक की नीतियों और मुद्रा अवमूल्यन जैसे मौद्रिक कारकों से प्रभावित होती है। 2025 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की संभावना है, जिससे चांदी को भी उसी तरह का समर्थन मिल सकता है जैसा पिछले मौद्रिक ढील के समय मिला था।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो क्या बताता है?
सतीश के अनुसार, वर्तमान में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 88.9 है, जो कि इसके ऐतिहासिक औसत 60 से काफी अधिक है। इसका मतलब है कि फिलहाल चांदी सोने की तुलना में अंडरवैल्यूड है और उसमें तेजी की अधिक संभावना है। 2008 और 2020 की आर्थिक मंदी के बाद भी जब यह अनुपात बढ़ा था, तब चांदी में जबरदस्त तेजी आई थी।
क्या 2025 में चांदी दे सकती है रिकॉर्ड रिटर्न?
यदि आप इस अक्षय तृतीया निवेश की सोच रहे हैं, तो चांदी एक मजबूत दावेदार बनकर सामने आई है। सतीश का कहना है कि औद्योगिक मांग, सीमित आपूर्ति और मौद्रिक समर्थन की वजह से चांदी 2025 में निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दे सकती है। हालांकि सोना अब भी एक भरोसेमंद दीर्घकालिक निवेश रहेगा, लेकिन पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए चांदी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
