झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से 7 माह के मासूम की मौत, परिवार में मचा कोहराम

  • रिपोर्ट: हरिश्चंद्र कासगंज

सोरों (कासगंज)। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम फरीदनगर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कथित रूप से झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के चलते 7 माह के मासूम की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम फरीदनगर निवासी प्रवीण के 7 माह के पुत्र धीरज की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। बच्चे को डायरिया की शिकायत थी, जिस पर परिजन उसे उपचार के लिए बरकुला रोड, सोरों स्थित एक निजी क्लीनिक पर ले गए, जहां कथित रूप से झोलाछाप डॉक्टर जगदीश चंद्र निवासी रफातपुर द्वारा उसका इलाज किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे को दो इंजेक्शन लगाए और कुछ दवाइयां देकर घर भेज दिया।

परिजन बच्चे को घर लेकर पहुंचे और डॉक्टर द्वारा दी गई दवा पिलाई, लेकिन दवा देने के लगभग 10 मिनट बाद ही बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। घबराए परिजन बच्चे को दोबारा डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें वहां से टाल दिया। इसके बाद परिजन बच्चे को कासगंज के कलावती अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक धीरज अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। उसके पिता प्रवीण टेंपो चालक हैं और उनकी शादी को अभी दो वर्ष ही हुए थे। बेटे की असमय मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। माता अंजली सहित सभी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

इस घटना ने एक बार फिर जिले में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यता के चल रहे ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई न होना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और अवैध क्लीनिकों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

 

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